धम्मपद – अप्पमादवग्गो # 4

उट्ठानवतो सतिमतो सुचिकम्मस्स निसम्मकारिनो। सञ्जतस्स च धम्मजीविनो अप्पमत्तस्स यसोभिवड्ढति ॥४॥ हिंदी अर्थ उद्योगी, जागरूक, पवित्र कर्म करने वाले, सोच समझ कर काम कारने वाले, संयमी, धर्मानुसार जीविका चलाने वाले, अप्रमादी मनुष्य के यश की वृद्धि होती है।

धम्मपद – अप्पमादवग्गो # 3

ते झायिनो साततिका निच्चं दळ्ह-परक्कमा । फुसन्ति धीरा निब्बाणं योगक्खेमं अनुत्तरं ॥३॥ हिंदी अर्थ ध्यान करनेवाले, जागरूक, नित्य दृढ़ पराक्रम में लगे रहनेवाले धीर-जन ही अनुत्तर योग-क्षेम निर्वाण को प्राप्त करते हैं ।

धम्मपद – अप्पमादवग्गो # 2

एवं विसेसतो अत्वा अप्पमादम्हि पण्डिता । अप्पमादे पमोदन्ति अरियानं गोचरे रता ।।२॥ हिंदी अर्थ अप्रमाद के विषय में उसे इस विशेषता को जान, आर्यों के आचरण में रत, पण्डित-जन अप्रमाद में प्रसन्न होते हैं ।

धम्मपद – अप्पमादवग्गो # 1

अप्पमादो अमत-पदं पमादो मच्चुनो पदं । अप्पमत्ता न मीयन्ति ये पमत्ता यथा मता ।। १।। हिंदी अर्थ अप्रमाद अमृत-पद है, प्रमाद मृत्यु का पद । अप्रमादी मनुष्य मरते नहीं, और प्रमादी मनुष्य मृत ही के समान होते हैं ।

संघ-वन्दना

सुपटिपन्नी भगवतो सावकसंघों, उजुपटिपन्नो भगवतो सावकसंघों, जायपटिपन्नो भगवतो सावकसंघो, सामीचिपटिपन्नो भगवतो सावकसंघों, आहुनेय्यो, पाहुनेय्यो, दक्खिनेय्यो, अञ्जलिकरणीयो, अनुत्तरं पुञ्जक्खेत्तं लोकस्सा ति । संघ जीवितपरियन्तं सरणं गच्छामि ।। 1 ।। ये च संघा अतीता च, ये च संघा अनागता । पच्चुप्पन्ना च ये संघा, अहं वन्दामि सब्बदा ।। 2 ।। नत्थि मे सरणं अञं संघो मे सरणं … Read more

नामकरण |Naming Ceremony in Buddhist Culture

नामकरण मानव जीवन का द्वितीय मंगलकार्य है। यह मंगल-कार्य बच्चे के जन्म के 10 दिन के बाद किसी भी दिन किया जा सकता है। इस मंगल कार्य को भिक्षु या अनागारिक या धर्माचार्य द्वारा सम्पन्न करवाना चाहिए। यदि किसी समय ये उपस्थित न हों तो उपासक-उपासिका को स्वयं मिल-जुल कर इस मंगल-कार्य को समुचित ढंग … Read more

धम्मपद – यमकवग्गो # 20

अप्पम्पि चे सहितं भासमानोधम्मस्स होति अनुधम्मचारी।रागञ्च दोसञ्च पहाय मोहं सम्मप्पजानो सुविमुत्तचित्तो ।अनुपादियानो इध वा हुरं वास भागवा सामञ्ञस्स होति ।।२०।। हिंदी अर्थ धर्म-ग्रन्यों का चाहे थोड़ा ही पाठ करे, लेकिन यदि राग, द्वेष तथा मोह से रहित कोई व्यक्ति धर्म के अनुसार आचरण करता है तो ऐसा बुद्धिमान, अनासक्त, यहाँ वहां (दोनों जगह) भोगों के … Read more

धम्मपद – यमकवग्गो # 19

बहुँपि चे सहितं भासमनोन तक्करो होति नरो पमत्तो। गोपो व गावो गणयं परेसंन भागवा सामञ्ञस्स होति ।।१।। हिंदी अर्थ धर्म-ग्रन्थों का कितना ही पाठ करे, लेकिन यदि प्रमाद के कारण मनुष्य उन धर्म-ग्रन्थों के अनुसार आचरण नहीं करता, तो दूसरों की गौवें गिनने वाले ग्वालों की तरह वह श्रमणत्व का भागी नहीं होता।

धम्मपद – यमकवग्गो # 18

इध नन्दति पेच्च नन्दतिकतपुञ्ञो उभयत्थ नन्दति ।पुञ्ञं मे कतन्ति नन्दति भीय्यो नन्दति सुग्गतिगतो ।।१८।। हिंदी अर्थ शुभ कर्म करनेवाला मनुष्य दोनों जगह आनन्दित होता है–यहाँ भी और परलोक में भी। मैने शुभ-कर्म किया है ‘ सोच आनन्दित होता है, सुगति को प्राप्त हो और भी आनन्दित होता है ।

बंदरों की भेड़चाल | The Monkeys Experiment

एक बार कुछ बंदरों को एक बड़े से पिंजरे में डाला गया और वहां पर एक सीढी लगाई गई। सीढी के ऊपरी भाग पर कुछ केले लटका दिए गए। उन केलों को खाने के लिए एक बन्दर सीढी के पास पहुंचा। जैसे ही वह बन्दर सीढी पर चढ़ने लगा, उस पर बहुत सारा ठंडा पानी … Read more